80+सदगुरू के अनमोल विचार|Sadguru Quotes Hindi|Sadguru Status Hindi 2021



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sadhguru Quotes in hindi:-shree jaggi maharaj is known as a sadguru in india he has lakhs of follower who worship sadhguru.

Sadguru always give hope to people who have lost their hope in life, he teaches how to live life worry free and how to live life with freedom.

He have said thousands of quotes, thoughts in his seminar which we have collected for you so you will get some inspiration from these, sadguru quotes in hindi, sadguru motivational quotes in hindi, sadguru quotes with images hindi, sadhguru vichar in hindi.


Sadhguru Quotes Hindi/सदगुरु कोट्स हिंदी में


पिछले साल के बोझ को गिरा देने का और तरोताजा और

जीवंत होने का यही समय है।




यौवन, जबरदस्त ऊर्जा का दौर होता है।

आपको इसे एक

संभावना की तरह देखना चाहिए,

न कि एक समस्या की तरह।




अगर आप एक समझदार इंसान हैं 

तो आप स्वाभाविक रूप

से प्रेममय और समावेशी होंगे।




दूसरों में जो भी सर्वश्रेष्ठ है,

उसको उजागर करने की आपकी

क्षमता ही आपको एक अच्छा नेता बनाती है।




अगर हम एक अधिक सौम्य और विवकेशील

समाज बनाना चाहते हैं तो उसके लिए हमें एक

सौम्य अर्थव्यवस्था चाहिए।




सृष्टिकर्ता की सृष्टि पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है, बजाय उस बकवास के, जिसे आप अपने सिर में पैदा करते हैं.



जीवन, जिन विभिन्न रूपों में प्रकट है,

उन सभी को सक्रिय

और सकारात्मक तरीके से स्वीकार करने पर, एक गहन

जीवन जीने की संभावना पैदा होती है।





हर इंसान के अन्दर, ईसा मसीह एक संभावना हैं। इस

संभावना में विकसित होने की जरूरत है। यह कोई धर्म नहीं, बल्कि आध्यात्मिक प्रक्रिया है।





आप जो भी कर रहे हैं,

उसमें सफल होने का एक महत्वपूर्ण

पहलू यह है कि आप सक्रिय बने रहें,

आपमें ठहराव नहीं आए।




आपकी बुद्धि, आपकी काबिलियत, और आपकी योग्यता

पूरी तरह से अभिव्यक्त तभी हो पाएगी, जब आप अपने

भीतर अच्छी तरह संतुलित होंगे।




पूरी तरह से शामिल होना, पर उलझना नहीं

 - यही चैतन्य का गुण है। अगर आप यह गुण बनाए रखते हैं, तो परम मुक्ति एक स्वाभाविक प्रक्रिया बन जाएगी।





अगर परिस्थितियां यह तय नहीं करतीं कि आप कौन हैं,

बल्कि आप तय करते हैं कि परिस्थितियां कैसी हों - तो यही सफलता है।




संसार में जो कुछ भी होता है, दरअसल, वो

एक तरह की लहर होती है।

अगर आप अच्छे नाविक हैं, तो हर लहर एक

संभावना होती है।





जाति, धर्म, और राष्ट्रीयता को लेकर, आपकी जो सीमित

पहचान है, वो विवाद और हिंसा को बढ़ावा देती है।




भारतीय अध्यात्म भीरु नहीं है। जो चीज हमारे लिए मायने

रखती है, हम उसके लिए प्रतिबद्ध होते हैं। हम जीवन के

लिए प्रतिबद्ध हैं।



आपको अभी जो भी करना है, उसे आप पूरी भागीदारी के

सथ कीजिए। सिर्फ तभी आप सचेतन होने की मिठास को

जान पाएंगे।




जब आप खुद को वैसा बना पाते हैं, जैसा आप चाहते हैं,

तब आप अपने भाग्य को भी वैसा गढ़ सकते हैं, जैसा आप

चाहते हैं।





अगर आप वाकई प्रसन्न और शानदार महसूस कर रहे हैं, तो आपको किसी के साथ कोई समस्या नहीं होगी।




लिंग भैरवी ने ग्यारह वर्ष का चक्र पूरा किया है, और इस

नवीन रूप में, देवी की कृपा महत्वपूर्ण हो जाएगी। जो

लोग देवी की कृपा अर्जित करते हैं, उनका जीवन धन्य हो

जाएगा।




जब आप हर चीज को अपने एक हिस्से के रूप में अनुभव

करते हैं, तो आप योग में होते हैं। वही मुक्ति है, वही परम

आजादी है।




जब आप हिसाब लगाने लगते हैं, मन में तनाव और संघर्ष

होता है। पर जब आप देते हैं, तो उसमें आनंद होता है।

चाहे वो खुशी हो या नाखुशी, दर्द हो या सुख, पीड़ा हो या

आनंद, वो मूल रूप से आपके भीतर ही होता है।





अगर आप जागृत अवस्था से नींद में जागरूकतापूर्वक जा

सकते हैं, तो आप जीवन से मुत्यु में भी जागरूकता पूर्वक जा पाएंगे।




आपके जीवन में अगर खासकर अप्रिय चीजें हुई हैं, तो

आपको आहत नहीं, समझदार होना चाहिए।




खुशी आपसे ही शुरू होती है - न कि आपके

रिश्ते, धंधे, या पैसे से।




एक इंसान के रूप में, आपको ये नहीं सोचना

चाहिए कि जीवन आपको कहां ले जाएगा।

आपको सिर्फ ये सोचना चाहिए कि आप उसे कहां

ले जाना चाहते हैं।




हमारे अंदर जो भी योग्यता, क्षमता, और प्रतिभा है - इन

सब के सिर्फ तभी मायने हैं जब हमारे अंदर संतुलन है।





मानव समाजों को सभ्य बनाने का मतलब यह सुनिश्चित

करना है कि हर इंसान, बिना किसी दूसरे के दखलअंदाजी

के, अपनी पूर्ण अभिव्यक्ति पा सकता है।




जीवन का आपका अनुभव कितना गहन है, और आप जो

करते हैं उसमें आप कितने असरदार हैं जीवन में बस

इतना ही वाकई में मायने रखता है।





यह शरीर पांच तत्वों से बना है - पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु,

और आकाश। आपके जीवन की गुणवत्ता मुख्य रूप से इस पर निर्भर करती है कि आपके भीतर ये पांच तत्व कितने शानदार हैं।




अगर आपके पास देखने की दृष्टि है, अगर आपमें अपने

भतर और बाहर जीवन को महसूस करने की संवेदनशीलता है, तो हर चीज एक चमत्कार लगेगी।




प्रेम किसी दूसरे के बारे में नहीं होता। प्रेम कोई कार्य नहीं है। प्रेम आपके होने का तरीका है।




अगर आप अंतिम पल तक आनंदपूर्वक जीते हैं, तो आपको मृत्यु की चिंता करने की जरूरत नहीं है - वो भी एक आनंदमय प्रक्रिया होगी।




अगर आप जीवन की गहरी अंतर्दृष्टि पाना चाहते हैं तो

आपके बारे में दूसरों की क्या राय है, इसके आपके लिए

कोई मायने नहीं होने चाहिए।




हर चीज के साथ एकाकार के आनंद को वो इंसान कभी नहीं जान पाएगा, जो किसी न किसी चीज के साथ उलझा रहता है।




अगर आप अपने अस्तित्व की बाध्यकारी, चक्रीय प्रकृति से

परे चले जाते हैं तो जीवन शानदार हो जाता है।

आपका मन एक आग के गोले की तरह है। अगर आप इसे

ठीक से संभाल पाते हैं, तो यह सूर्य की तरह बन सकता है।




अस्तित्व की जो मूल प्रकृति वो निरंतर सह- अस्तित्व की है।इसे ही किसी भी समाज के निर्माण का आधार होना चाहिए।



अगर आप अपने जीवन से इस एक हिसाब को निकाल देते हैं कि 'इससे मुझे क्या मिलेगा?' तो आप पूर्ण रूप से बेहद करुणामय हो जाएंगे।




धर्म के नाम पर लोगों ने अपनी दृष्टि खो दी है - क्योंकि वे

किसी चीज में आंख मूंदकर विश्वास कर लेते हैं।

अपने भविष्य की चिंता मत कीजिए। आप अपने वर्तमान को अच्छे से संभालिए और आपका भविष्य खिल उठेगा।




जीवन की सुंदरता और भव्यता को सिर्फ वही जानता

है जो हर चीज के साथ पूरी तरह से शामिल होता है।




जो व्यक्ति अस्तित्व की संपूर्णता को सुनता है, उसके लिए

हर चीज संगीत है।

ईष्ष्या और जलन की बुनियादी प्रकृति है: अधूरापन व

अपूर्णता की भावना। अगर आप वाकई आनंद में हैं, तो

आपको किसी से ईष्या नहीं होगी।




योग का मतलब लचीला बनना है - सिर्फ शारीरिक रूप से

नहीं, बल्कि हर तरह से। इसका मतलब है कि आप जहां भी है, आप अच्छे से हैं।




युवा बने रहने का मतलब है कि आप जीवन के प्रति खुले हैं, सीखने और विकास करने के लिए हरदम तैयार हैं।




एक बीज जो उग नहीं सकता, वह कंकड़ के समान है।

आपमें जो दिव्यता का बीज है, उसके खिलने के लिए,

आपको खुलना होगा।




एक बार जब आप खुद को मन की कुटिलता से आजाद क

लेते हैं, तो बिना किसी भेद-भाव के प्रेम और समावेश की

भावना पैदा होती है।




जैसे ही आप सभी चीजों से अपनी पहचान बनाना बंद कर

देते हैं, मन शांत हो जाता है।




एक बीज जो उग नहीं सकता, वह कंकड़ के समान है।

आपमें जो दिव्यता का बीज है, उसके खिलने के लिए,

आपको खुलना होगा।




आध्यात्मिक होने का मतलब सुस्त व नीरस होना नहीं है। जो इंसान जीवन और आनंद से भरपूर है, सिर्फ वही वास्तव में आजाद हो सकता है।




मृत्यु कभी खतरनाक नहीं होती। जब मृत्यु होती है तो सारा

खतरा खत्म हो जाता है।





अगर आप अपने व्यक्तित्व के ढांचे को तोड़ देते हैं, तो आप

बस एक उपस्थिति बन जाएंगे - जैसा कि जीवन है, जैसा

कि चैतन्य है - ये बस एक उपस्थिति है।




आप जितनी ज्यादा सुरक्षा खोजते हैं, अपने जीवन में होने

वाले हर बदलाव को लेकर आप उतने ही ज्यादा परेशान

रहेंगे।




धरती माता बहुत उदार हैं। अगर हम सिर्फ उसे एक मौका

दें, तो वह फिर से सबकुछ भर देगी- पूरी प्रचुरता और

सुंदरता के साथ।




हम बीते कल को ठीक नहीं कर सकते, लेकिन हम आने

वाले कल का निर्माण कर सकते हैं।





आखिरकार, जीवन न तो पीड़ा है और न ही आनंद। यह

वैसा बन जाता है, जैसा आप उसे बनाते हैं।




डर और चिंता आपकी कल्पना के बेकाबू होने का नतीजा

हैं। आप एक ऐसी स्थिति से दुखी हो रहे हैं जो शायद कभी

घटित ही न हो।




समाज को इंसान की चेतना को नहीं गढ़ना चाहिए। मानव

चेतना को समाज को गढ़ना चाहिए।




स्वयंसेवा करने का मतलब है इच्छुक बने

रहना। निजी पसंदों-नापसंदों से परे जाकर

हरदम इच्छुक बने रहना ही मुक्ति का मार्ग है।





किसी भी पहलू के बारे में आप जितना

ज्यादा जानते हैं, आप उसे उतना ही बेहतर संभाल सकते हैं। यह.




आप अपने कार्य खुद को उलझाने के लिए करते हैं -

तो उसे कर्म कहा जाता है। अगर आप उसी कार्य को खुद

को मुक्त करने के लिए करते हैं तो उसे धर्म कहा जाता है।

हम जहां भी हों, हमसे जो भी बन सके हमें करना चाहिए।

अपनी मानवता की शक्ति दिखाने का यही समय है।






आदियोगी का महत्व यह है कि उन्होंने मानव चेतना के

विकास के लिए कई विधियाँ प्रदान की जो हर समय में

प्रासंगिक हैं।



दक्षिण भारतीय संगीत, नृत्य, और कला मंदिरों से आते हैं।

भक्ति इन सभी कलाओं का आधार है।



एक बार जब आपको यह समझ आ जाती है कि यहां

आपका समय सीमित है, तब आप समझदारी से जीवन जिएंगे।




मेरी माँ ने मेरे लिए एक ऐसा वातावरण बनाया था, जिसके

बिना मैं वो नहीं होता जो मैं हूँ। मातृत्व जन्म देने के बारे में

नहीं है, बल्कि बिना शर्त समावेश के बारे में है।




दरअसल, कर्म का मतलब है कि आप जीवन को

विवशतापूर्ण प्रतिक्रिया से सचेतन क्रिया की ओर ले जाते हैं।



आप अपने मन के साथ खेलें, न कि आपका मन आपके

साथ खेले।



जब आप अपने विचारों और भावनाओं से दटूरी बना लेते हैं। तो आप प्रबुद्ध प्राणियों की कृपा के पात्र बन सकते हैं।




आपके भीतर जो हो रहा है और आप अपने जीवन को

जैसे अनुभव करते हैं, वह पूरी तरह से आपका बनाया है।

आपका कर्म है।




बाहरी परिस्थितियां और हालात चाहे जैसे

भी हों - जीवन को जीने की भीतरी शक्ति,

संतुलन और क्षमता का होना ही आजादी है।




मूल रूप से देखें तो असली स्वास्थ्य का

मतलब है: प्रकृति के साथ तालमेल में होना

- बाहरी और भीतरी प्रकृति, दोनों के साथ।





उम्मीद, दुखी लोगों के लिए है। वे उम्मीद

करते हैं कि कल वे आनंद में होगे। आनंदित

लोग इस पल में ही आनंदित हैं।



हर इंसान के पास सपने होते हैं, लेकिन

कितने लोग उस सपने को साकार करने के

लिए अपना जीवन दांव पर लगाने को तैयार हैं?




शरीर व्यक्तिगत होता है। मन व्यक्तिगत

होता है। चेतना व्यक्तिगत नहीं हो सकती -

यह सिर्फ समावेशी हो सकती है।




सवाल यह नहीं है कि आप कितना कुछ

करते हैं। सवाल सिर्फ ये है कि क्या आप

पूरी तरह से समर्पित हैं। क्या आपका

जीवन पूरे प्रवाह में है?





गुरु एक ऐसा दोस्त होता है, जो आपके

अहंकार को हरदम कुचलता रहता है। ये

एक बहुत ही बारीक़ काम है।




जो लोग अपने दिमाग के कचरे को एक

किनारे रख देते हैं, सिर्फ वे ही करुणा और

प्रेम करने के वाकई काबिल होते हैं।





मन में जो चल रहा है, उसका एक बहुत

बड़ा हिस्सा बस मन का दस्त है - ये हर वक्त

मजबूरन चलता ही रहता है।





शक करना बुद्धिमानी नहीं है। असल में,

बुद्धि का स्तर जितना कम होता है, लोग

उतना ही ज्यादा शक्की होते हैं।




आपके भीतर का जीवन नाखुश नहीं हो

सकता। नाखुशी तो मन में पैदा होती है।

गुरु की तलाश मत कीजिए। जब अज्ञानता

का दर्द, आपके अन्दर चीख का रूप ले

लेता है, तो गुरु आपको ढूंढते हुए आ जाते हैं।





आप चाहे जिस भी हालात से गुजर रहे हों,

अगर आप उसको लेकर जागरूक हैं और

कोई सरल आध्यात्मिक साधना करते हैं, तो

वह अपने आप ठीक हो जाएगा।




आध्यात्मिक व्यक्ति और सांसारिक व्यक्ति

दोनों ही उसी अनंत को खोज रहे हैं। एक

उसे सचेतन रूप से खोज रहा है और दूसरा

अनजाने में।




जीवन आपसे हर तरह के सर्कस, बाजीगरी

और करतब तो कराते ही रहता है। अगर

आप अच्छी तरह तैयार हैं, तो आप इसे

आनंदपूर्वक कर सकते हैं।





आर करतब ता करात हो रहता है। अगर

आप अच्छी तरह तैयार हैं, तो आप इसे

आनंदपूर्वक कर सकते हैं।





आप अपने मन के साथ खेलें, न कि

आपका मन आपके साथ खेले।





जब कोई दूसरा यह तय कर सकता है कि

आप खुश है या नाखुश, तो क्या यह सबसे

बुरी किस्म की गुलामी नहीं है?

जिन से मिल कर ज़िंदगी से इश्क़ हो जाए वो लोग

आप ने शायद न देखे हों मगर ऐसे भी हैं





भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को आपके

अंदर शुरू होना होगा, क्योंकि ईमानदारी

एक आंतरिक गुण है।





अगर आप ध्यान की अवस्था में हैं, तो

नकारात्मक ऊर्जाएं आपको छू नहीं सकतीं।




आप अपने मन से जितनी ज्यादा पहचान

बनाते हैं, आप स्वयं से उतना ही दूर हो जाते हैं।




धरती की तरह, पेड़ की तरह - एक

विशुद्ध जीवन बन जाइए। अगर आप एक

विशुद्ध जीवन हैं, तो आपकी मानव चेतना

स्वाभाविक रूप से व्यक्त होगी।




जब बुद्धि भक्ति, प्रेम और सहभागिता से

संतुलित होती है, सिर्फ तभी यह एक अच्छी

चीज़ है। वरना यह खुद में एक सिरदर्द है।




अगर हम अपने परिवार, समाज, देश,

और दुनिया में स्थिरता लाना चाहते हैं, तो

हमें एक-एक इंसान में स्थिरता पैदा करना होगा।






जीवन इतना अगाध है कि बहुत कुछ

समझाया नहीं जा सकता - इसे सिर्फ

अनुभव किया जा सकता है।




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